बुधवार, 29 जून 2016

Satopanth Badrinath Journey

जीवन की इस अापाधापी और रोज़ रोज़ के तनाव से कुछ पल खुद के लिए निकाल लेना भी जरूरी होता है ! हमेशा काम करते रहेंगे तो अाप पूरी क्षमता से अपना काम नही कर पाएंगे , इसलिए जरूरी हो जाता है कि अाप थोड़ा सा ब्रेक ले लें और फिर से अपने काम में स्फूर्ति और जोष ले अायें !


हम कुछ लोगो का एक वहॉट्स ग्रुप है मुसाफिरनामा.... दोस्तों का जिसकी समय समय पर मीटिंग होती रहती हैं ! इसी ग्रुप की एक मीटिंग अप्रैल में दिल्ली में हुई थी और उसी में सतोपंथ जाने का प्रोग्राम बना , विचार ये था कि हम 15 जून को सतोपंथ पहुंचें और 16 जून को वहां से निकलें ! यानि हमारे पास पूरी एक रात होगी वहां के लिए और दिन का भी कुछ हिस्सा मिल रहा था ! सतोपंथ बद्रीनाथ से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर एक बेहद कठिन और दुर्गम ट्रेक करके जाना होता है ! क्योंकि मैं बद्रीनाथ पहले भी जा चुका हूँ और पिछले साल उसका यात्रा वृतान्त भी लिख चुका हूँ इसलिए इस यात्रा वृतान्त में , मैं अापको गाजियाबाद से बद्रीनाथ जाने तक का वृतान्त नही सुनाऊंगा ! इसलिए मैं अपना वृतान्त बद्रीनाथ पहुंचने के बाद से शुरू करूंगा !  अगर अाप चाहें तो उस यात्रा वृतान्त को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कर सकते हैं ! लेकिन एक बात जरूर लिखना चाहूंगा,  वो ये कि अगर अाप यात्रा सीजन में सार्वजनिक व्हीकल से  बद्रीनाथ जाना चाह रहे हैं तो हरिद्वार या ऋषिकेश से बस की सीट पहले से रिज़र्व करा लें , भीड़ बहुत होती है ! GMVN या विश्वनाथ सेवा की बस में बेहतर है ! इंटरनेट से इनका नंबर लीजिए और सीट बुक करा दीजिये ! तो अाइए बद्रीनाथ पहुंचते हैं ! इस यात्रा में मेरे साथ गुडगांव से अमित तिवारी , दिल्ली से बीनू कुकरेती , सचिन त्यागी, संदीप पंवार उर्फ जाट देवता और कमल कुमार सिंह , गाजियाबाद से मैं और संजीव त्यागी , पटियाला पंजाब से सुशील कुमार जी , उधमपुर से रमेश जी और ग्वालियर से विकास नारायण श्रीवास्तव शामिल थे जबकि अगले दिन श्रीनगर उत्तराखंड से सुमित नौटियाल भी हमारे साथ अ गए !




सुबह 4:30 बजे हरिद्वार से निकलकर शाम 5 बजे हम बद्रीनाथ पहुंच पाये । होटल में पहुंच कर आराम किया और अगले दिन acclimatize होने के लिये बद्रीनाथ के ऊपर की पहाडी पर जाने का प्रोग्राम बनाया । इस पहाडी को चरण पादुका कहते हैं और इसी रास्ते पर आगे जाने पर नीलकंठ पर्वत के भी दर्शन होते हैं ।  यहॉ आपको उर्वशी कुण्ड तो नहीं दिखाई देगा लेकिन उस कुण्ड से आने वाले शानदार वॉटर फॉल जरूर देख सकते हैं ।  3380 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ये चरण पादुका भगवान विष्णु के कदम माने जाते हैं और ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु ने प्रथम बार पृथ्वी पर यहीं अपने कदम रखे थे । ये चरण यहॉ स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं ।


अगले दिन यानि 12 जून को स्नान करके पहले बद्रीनाथ भगवान के दर्शन करने का विचार था लेकिन भीड़ को देखते हुये टाल दिया और सीधे acclimatize  होने के लिये पहाडी की तरफ चल दिये । मैं और संजीव त्यागी जी साथ चल रहे थे । सबके पास स्टिक थी और मैं दुकानों की तरफ देखता हुआ चल रहा था कि कहीं मुझे भी लकडी की कोई स्टिक मिल जाये । इससे पहाड चढने में थोड़ा आसानी हो जाती है । बांये हाथ पर एक चाय की दुकान पर दो छडी टेबल के किनारे रखी दिखाई दे गईं । मैंने पूछा - भाई कितने की है ? इतना सुनते ही एक बुजुर्ग कडक कर बोले ये मेरी है ! ओह ! मैं चल दिया लेकिन फिर बोलो चाहिये तो ले जाओ , 10 रूपये की है । मैं तो ढूंढ ही रहा था, मुझे क्या दिक्कत हो सकती थी ।

बढिया सीमेंटेड रास्ता बना है लेकिन ये सिर्फ हनुमान मंदिर तक ही है फिर पगडंडी सी दिखाई देने लगती है । थोड़ा आगे जाकर हमारा ग्रुप स्वतह ही दो हिस्सों में बट गया । एक तरफ मैं , कमल कुमार और अमित तिवारी जी तथा दूसरी तरफ सचिन त्यागी जी, रमेश जी, सुशील जी, विकास नारायण दुूसरी पहाडी पर चले गये । बेहतरीन नजारों को देखते हुये बहुत आगे तक और बहुत ऊपर तक पहुंच गये । उधर वाले लोगों का पूरा विचार था कि नीलकंठ तक होकर आया जाये लेकिन मौसम बहुत खराब होने लगा था और वापस लौट कर आना पडा । हालांकि जल्दी ही मौसम सुधर भी गया लेकिन तब तक हम वापस उतर चुके थे और अब दोबारा जाने का कोई मतलब ही नहीं बनता था । 

कल यानि 13 जून की सुबह सतोपंथ के ट्रेक की शुरूआत करेंगे । साथ में ही चलिएगा :




बद्रीनाथ पहुंचने के रास्ते में , विष्णु प्रयाग से अागे निकलकर फोटो क्लिक मारी( On The Way of Badrinath near VishnuPrayag)



इन्हें अाप जानते ही होंगे ? बद्रीनाथ मंदिर पीछे








Jai Badri Vishal !!


बद्रीनाथ का तप्त कुण्ड ! बहुत गर्म पानी होता है इसमें( Hot Water Reservoir)



इस बार चारधाम यात्रा में अच्छी भीड़ चल रही है ! भय खत्म हो रहा है अऊर श्रधा अऊर अस्था जीत रही है( Many people are coming for Chardham Yatra this year )




12 जून है ! हम चरण पादुका की तरफ निकल रहे हैं( Now Moving to Charan paduka Trek)

12 जून है ! हम चरण पादुका की तरफ निकल रहे हैं






Have a Very Good Morning !!





This is Badrinath City !! Can you believe it 





कुछ दूर तक रास्ता ऐसा ही बना है ! बढ़िया( Its a cemented pass upto about 1.5 Km)

















सब इनके बाबा के फोटो लेने लग गए तो उन्होंने अपने चेहरे को इस दुपट्टे से ढक लिया

जय हो !!







ऐसी ही गुफाएं मिलेंगी बहुत सारी सतोपंथ की यात्रा में( Its one only , There are many caves on the way of Satopanth)



किसी आर्मी डिवीज़न की ट्रेनिंग चल रही है ! इनके पास ही मैने पहली बार Ice Axe  देखी



बहुत ही ठंडा पानी था ये , मैंने  और कमल भाई ने पीया था



मां और उसका बच्चा( Mother & Her Child ) !!

ये रास्ता बताने वाले निशान हैं !( It tells about your way )














What a beautiful nature !! Look it again




मौसम खराब होने लग रहा है ! वापस चलते हैं














उतर अाये नीचे ! अब कल की तैयारी


                                                       


                                                          अगली पोस्ट में सतोपंथ चलने की तैयारी करके अाइए :




शुक्रवार, 24 जून 2016

Bharat Mata Mandir & Ganga Arti : Varanasi

 इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करिये ! सीधे बनारस की और पोस्ट तक जाने के लिए यहाँ हिट करिये !
चिलचिलाती धूप में सिर पर अंगोछा और हाथ में पानी की बोतल ! सबसे जरूरी चीजें हैं , काला चश्मा और हो तो बहुत बढ़िया ! हमारा तो ये है कि काला चश्मा लगा लें तो लोगबाग कहते हैं देखो - मोहरा फ़िल्म का नसरुद्दीन शाह अा गया ! हम कोई करिश्मा - रवीना तो हैं नही कि कोई हमारे लिए गाएगा -​गोरे ​गोरे मुखड़े पै काला काला चश्मा ! काला चश्मा सच में गोरी मैम पर बहुत मस्त लगता है !


चलो यार , यहाँ तो धमेक स्तूप , धर्मराजिका स्तूप  सब देख लिए अब भारत माता मंदिर चलते हैं ! इस मंदिर के बाद बस अाखिर में गंगा की अारती देखनी है ! तो सारनाथ से सीधा कैंट का ऑटो पकड़ते हैं , कैंट मतलब वाराणसी का रेलवे स्टेशन ! सीधा सारनाथ से ही मिल गया , लेकिन उस को पहले ही कह दिया था भाई कहीं दो मिनट रोक के कोल्ड ड्रिंक दिला दियो ! साढ़े चार बज रहे हैं , लकिन लगता नही कि दोपहर गुजर चुकी है , सूरज महाराज पूरे गुस्से में हैं ! इतना गुस्सा ठीक नही है सूर्य देव , अापने उत्तर प्रदेश और बिहार में कई लोगो को अपना शिकार बना लिया है , तेलंगाना में तो अापने एक ही दिन में 60 से ज्यादा लोगो को अपना शिकार बना लिया , ये गलत बात है ! और भी ज्यादा गलत बात ये है कि तुम हमेशा गरीब लोगो को ही अपना शिकार बनाते हो !



जाम ! फिर से ! हो गया काम ! भारत माता मंदिर शाम 5 बजे तक ही खुलता है ! मुश्किल लग रहा है समय से पहुंच पाना ! ऑटो वाला भी पता नही कहां कहां से लेकर अाया  है ! ओह ! सवा पांच बज गए और मंदिर बंद है ! हाँ , लेकिन कुछ लोग अभी बाहर हैं वो बता रहे हैं कि अंदर कोई प्रतिमा , कोई मूर्ति नही है ! बस भारत माता का मैप बना हुअा है ! थोड़ा इतिहास भी तो देख लें , भारत माता मंदिर का !


भारत माता मंदिर , वाराणसी के मुख्य रेलवे स्टेशन के बिल्कुल नजदीक है ! यहाँ के स्टेशन को केंट बोलते हैं ! दस मिनट की वाकिंग डिस्टेंस पर महात्मा गांधी काशी विध्यापीठ का कैंपस है , उसी में भारत माता का मंदिर भी है ! इसकी संरचना मंदिरों जैसी नही बल्कि किसी बढ़िया हवेली जैसी है ! इसे बाबू शिव प्रसाद गुप्त ने सन 1936 में बनवाया था जिसका उद्घाटन महात्मा गांधी ने किया ! ये वास्तव में महात्मा गांधी काशी विध्यापीठ का कैंपस है और यहीं इसी कैंपस में ललित कला महाविद्यालय भी है जहां बहुत बेहतरीन मूर्ति कला के नमूने भी दिखाई देते हैं !


तो चलो अाज भारत माता मंदिर के अंदर नही जा पाए तो कोई बात नही , कम से कम ये मूर्तियां तो देखने को मिली ! दिक्कत ये हुई कि पहले जो ब्लॉग पढ़े थे उनमें भारत माता मंदिर का समय सुबह 9 :30 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक का लिखा था और यही गड़बड़ हो गयी ! असल टाइम सुबह साढ़े नौ बजे से शाम पांच बजे तक का है !


अब निकलना है और यहाँ से अब सीधे वाराणसी के घाट देखने चलेंगे ! गंगा के ठंडे ठंडे पानी में स्नान करेंगे और शरीर पर जो गंदगी की परत जमी हुई है इसे थोड़ा हल्का कर लिया जाए ! शानदार नजारा है , हर घाट पर ! मैं अस्सी घाट से गंगा के किनारे पहुंचा और वहीं स्नान करके अागे बढ़ता चला गया ! एक एक घाट को देखता -निहारता दशाश्वमेघ घाट जाऊँगा ! इन्ही घाटों में कइयों पर अारती की तैयारी चल रही है लेकिन मेरी मंजिल अाज शाम की अारती दशाश्वमेघ घाट पर देखने की है ! शानदार और भक्तिमय नजारा है सब तरफ ! छोटे छोटे दिये गंगा की गोद में ऐसे लग रहे हैं जैसे एक अासमान नीचे उतर अाया हो और ये छोटे छोटे दीपक उस अासमान के तारे हों जो टिमटिमा रहे हैं ! दशाश्वमेघ घाट पहुंच गया हूँ ! दिल की गहराइयों को छू जाने वाले भजन सुनकर मन प्रफुल्लित हो रहा है ! दिल कर रहा है यहीं रम जाऊं लेकिन गृहस्थी -परिवार की अपनी जिम्मेदारियां होती हैं , मैं साधू नही हूँ !!


चलता हूँ ! ट्रेन पकड़ के गाजियाबाद  ! राम राम !












अस्सी घाट पर ( At Assi Ghat ) Bank Of Ganges
अस्सी घाट पर ( At Assi Ghat ) Bank Of Ganges
सुबह ए बनारस ! लेकिन मेरे लिए शाम ए बनारस ( Its Subah E Banars but for me Shaam e Banaras )
सुबह ए बनारस ! लेकिन मेरे लिए शाम ए बनारस ( Its Subah E Banars but for me Shaam e Banaras )




​गंगा अारती की तैयारी ( Ready For Gangaa Arti )
​गंगा अारती की तैयारी ( Ready For Gangaa Arti )

​गंगा अारती की तैयारी ( Ready For Gangaa Arti )
जीवन का अंत ! यही सच है !  End of The life and This is Universal Truth
​गंगा अारती की तैयारी ( Ready For Gangaa Arti )









अागे जल्दी ही मिलेंगे , सतोपंथ -स्वर्गारोहिणी की एक पवित्र और खूबसूरत यात्रा के साथ !